चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा स्थापित, प्राचीन भारत का विशाल मौर्य साम्राज्य 322 ईसा पूर्व था। यह अपने समय के सबसे शक्तिशाली साम्राज्य बना। मौर्य साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र (पटना) में स्थापित था और यह साम्राज्य पूर्व की ओर से लेकर मगध तक फैला हुआ था। अशोक के शासनकाल में यह अपने अंतिम चरम पर था, मौर्य साम्राज्य पांच मिलियन वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ था, जो की भारतीय उपमहाद्वीप में अब तक का सबसे बड़ा साम्राज्य था।
बाहरी और आंतरिक व्यापार और कृषि सहित सभी आर्थिक रूप से फल-फूल रही थी। क्योंकि इसका श्रेय सुरक्षा, वित्त और प्रशासन की एकल सुव्यवस्थित प्रणाली को जाती है। अशोक के शासनकाल के दौरान, कलिंग युद्ध के बाद से मौर्य साम्राज्य ने लगभग आधी सदी तक शांति और सुरक्षा को कायम रखा। मौर्यकाल में धार्मिक परिवर्तन, ज्ञान-विज्ञान के विस्तार और सामाजिक सामंजस्य को भी लम्बे समय तक बना रखा।
चंद्रगुप्त मौर्य ने जैन धर्म में परिवर्तित हो गए थे। इसी तरह, अशोक ने भी बौद्ध धर्म को अपनाया जिसके परिणाम स्वरूप पूरे साम्राज्य में अहिंसा, राजनीतिक और सामाजिक शांति बरक़रार रही। उस समय मौर्य साम्राज्य सबसे अधिक आबादी वाला साम्राज्यों में से एक था। मौर्य काल के लिखित अभिलेखों के अनुसार प्राथमिक स्रोत अशोक के शिलालेख और अर्थशास्त्र हैं।
मौर्य साम्राज्य का इतिहास
चंद्रगुप्त मौर्य ने चाणक्य की सहायता से मौर्य साम्राज्य की स्थापना की थी। मौर्य साम्राज्य का उदय होना, एक विवाद और रहस्य से घिरा हुआ है। मगध के सिंहासन को चंद्रगुप्त मौर्य ने अंतिम नन्द वंश के शासक नंद को हराया कर अपनी जीत हासिल की था। तब जाकर वह उत्तरी भारत के सिकंदर के उत्तराधिकारियों को चंद्रगुप्त मौर्य ने पश्चिमी क्षेत्र से खदेड़ कर भागा दिया और वह पूर्वी इराक और अफगानिस्तान की ओर अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए आगे बढ़े। चंद्रगुप्त मौर्य ने एक कुशल और मजबूत केंद्र सरकार की नींव रखी।
चंद्रगुप्त मौर्य के बाद उसका उत्तराधिकारी पुत्र बिन्दुसार ने 298-272 ईसा पूर्व तक शासन किया। बिन्दुसार ने अपने शासनकाल में मध्य भारत को जीतकर मौर्य साम्राज्य का विस्तार जारी रखा। चंद्रगुप्त के विपरीत, जो जैन धर्म के प्रति प्रबल विश्वासी थे, बिंदुसार अजीविका संप्रदाय के अनुयायी थे। उनके गुरु का नाम ब्राह्मण थे। उनकी पत्नी सेलयूसिड्स थी। बिंदुसार को ब्राह्मण मठों में कई अनुदान प्रदान करने का श्रेय दिया जाता है, जिन्हें ब्राह्मण-भट्टो के नाम से भी जाना जाता है।
वहीं बिन्दुसार का उत्तराधिकारी पुत्र अशोक था, जिसने 272-232 ईसा पूर्व तक शासनकाल था। उन्होंने न केवल भारत के इतिहास में बल्कि दुनिया भर में सबसे शानदार शासक व कमांडरों में से एक माना जाता है। उसने पश्चिमी और दक्षिणी भारत में साम्राज्य की श्रेष्ठता पर जोर दिया था। वह एक आक्रामकता व्यक्ति होने के साथ-साथ एक महत्वाकांक्षी सम्राट भी थे। अशोक के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना कलिंग पर विजय पाने में सक्षम थे। उन्होंने युद्ध को त्याग कर बौद्ध धर्म को अपनाया और प्रचार किया।
मौर्य साम्राज्य के बारे में रोचक तथ्य
सारनाथ में अशोक की शेर की राजधानी आज के समय भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है। जो पत्थर से बना है। यह लौह युग के दौरान मौर्य साम्राज्य का विकास हुआ और संपन्न हुआ था। मौर्य साम्राज्य में शामिल न होने वाले कुछ मित्रवत राज्य पांड्य, चेर और चोल शासक थे।
अपने चरम पर, मौर्य साम्राज्य न केवल देश के इतिहास में बल्कि दुनिया भर में सबसे बड़ा साम्राज्य के रूप में उभरे थे। सूत्र से पता चलता हैं कि चंद्रगुप्त मौर्य और चाणक्य ने हिमालय के राजा परवक्ता के साथ एक गठबंधन बनाया, जिसे अक्सर पोरस के नाम से पहचाने जाता थे।
मौर्य साम्राज्य को देश की पहली केंद्रीकृत शक्ति मानी जाती है; इसका प्रशासन अत्यंत कुशल व समृद्ध था।
मौर्य सेना दुनिया भर में सबसे बड़ी सेनाओं में से एक था। यह अच्छी तरह से कुशल व प्रशिक्षित योद्धा थे और युद्ध के मैदान में कई संरचनाओं का उपयोग करने में बेहद माहिर थे।
चाणक्य और चंद्रगुप्त मौर्य को माप और तौल के एकरूपता का श्रेय दिया जाता है।
चंद्रगुप्त ने अपने साम्राज्य में एक ही मुद्रा की व्यवस्था को स्थापित की।