जब भी कभी मुगल काल की बात होती है तो लोगों को सबसे पहले मुगल शासकों की क्रूरता, तानाशाही और राजशाही की तस्वीर सामने आती है। भारत के इतिहास के पन्नों में दर्ज कहानियों से पता चलता है कि मुगल काल में महिलाओं पर काफी अत्याचार किया गया। उनके हरम में रहने वाली महिलाओं के साथ, होने वाले व्यवहार के बारे में काफी कुछ सुना और पढ़ा होगा। लेकिन, इसके उलट मुगल काल में कई महिलाएं ऐसी भी रही चुकी हैं, जिनका जिक्र राजाओं के बराबर का दर्जा दिया जाता है। साथ ही वो मुगल दरबार में राजाओं के बराबर में रही थी।
ऐसे में आज हम आपको एक मुग़लिया महिलाओं के बारे में बता रहे हैं, जिन्होंने मुगलकाल के दौरान अपना खास पद व स्थान बनाया और उनका महिलाओं का नाम भारत के इतिहास के पन्नों में दर्ज है।
नूरजहां
जब मुगल साम्राज्य की शक्तिशाली महिलाओं की बात आती है तो सबसे पहले जुबा पर नूरजहां का नाम आता है।क्योंकि यह जहांगीर पत्नी होने के बाद भी वो सिर्फ पर्दे के पीछे ही नहीं रही, बल्कि उन्होंने कई रणनीतियों में अहम भूमिका निभाई है। ऐसा कहा जाता है कि नूरजहां एक खूबसूरत और बुद्धिमान महिला में एक थीं, जिन्हें इतिहास पढ़ने जैसी साहित्य, कविता और ललित कलाओं से बेहद रूचि था। कहा जाता है कि एक बार नूरजहां ने एक ही निशाने में शेर को मार गिराया था। उसके साथ ही नूरजहां ने जहांगीर के रहते हुए मुग़ल शासन का काफी कार्य संभाला और उनका प्रभाव इतना रहा था कि सिक्कों पर भी नूरजहां का नाम दर्ज था। नूरजहां ने लंबे समय तक जहांगीर के शासन को आसानी से संभाला लिया था।
जहांआरा बेगम
जहांआरा बेगम शाहजहां और महारानी मुमताज महल की सबसे बड़ी बेटी थी। मुग़ल की शहजादी जहांआरा को भारत ही नहीं,बल्कि दुनिया की सबसे अमीर महिला से एक माना जाता था। उस काल में जब पश्चिमी देशों के लोग भारत पहुंचते थे तो यह देखकर आश्चर्य थे कि भारतीय महिलाओं के पास उनके देशों के मुकाबले कहीं ज्यादा अधिकार मिले हुए थे। एक समय ऐसा भी आया जब जहांआरा को पादशाह बेगम बनाया गया था। यह मुगल साम्राज्य का सबसे बड़ा पद था। जिस दिन जहांआरा को ये उपाधि दी गई थी उसी दिन उन्हें एक लाख अशर्फियां साथ में दी गईं। इसके अलावा चार लाख रुपये सालाना के तौर पर भी दी गई।
दिलरास बानो बेगम
1637 में औरंगजेब ने सफविद की राजकुमारी दिलरस बानो से शादी की, जिसे राबिया-उद-दौरानी के नाम से भी जाना जाती थी। वह औरंगजेब की पसंदीदा और पहली पत्नी थीं।आपको बता दें कि औरंगाबाद में स्थित बीबी का मकबरा, जोकि ताज महल के हूबहू बनवाया गया था। औरंगज़ेब के पुत्र आज़म शाह ने अपनी माँ दिलरस बानो बेगम की याद में यह महल बनवाया था। ये उनकी आरामगाह के तौर पर बनावाया गया था।
माहम अंगा
कहा जाता है कि अकबर के शासन काल में माहम अंगा ने पर्दे के पीछे रहते हुए भी शासन में हस्तक्षेप किया और कई सामाजिक कार्य भी किए। एक रिपोर्ट्स के अनुसार, अकबर के शासनकाल के दौरान राजनीतिक सलाहकार और वास्तविक राज प्रतिनिधि भी थीं। इसके साथ ही अकबर के समय में किए गए कई निर्माण कार्यों के पीछे माहम अंगा को श्रेय माना जाता है।